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Bihar Election बड़ा धमाका: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने न केवल राजनीतिक समीकरणों को हिला दिया, बल्कि यादव परिवार के आंतरिक कलह को भी सामने ला खड़ा किया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की करारी हार के ठीक एक दिन बाद, लालू प्रसाद यादव की सबसे छोटी बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाली पोस्ट साझा की। उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने के साथ-साथ परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान किया, जो पार्टी और परिवार दोनों के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है। यह घटना बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ रही है, जहां परिवारवाद पर सवाल उठ रहे हैं।

आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
Bihar Election बड़ा धमाका: RJD की हार ने खोला पिटारा
14 नवंबर 2025 को घोषित बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों ने महागठबंधन को बुरी तरह पटखनी दी। RJD
को महज 25 सीटें मिलीं, जबकि एनडीए ने 202 सीटों पर कब्जा जमाया। तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली पार्टी को
अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिससे लालू परिवार की सियासी विरासत पर सवाल खड़े हो गए। इसी हार के साये
में रोहिणी आचार्य का फैसला आया, जो चुनाव से पहले भी पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत दे रही थीं।
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चुनाव प्रचार के दौरान रोहिणी सक्रिय रहीं, लेकिन नतीजों के बाद उनकी चुप्पी टूटी। विशेषज्ञों का मानना है कि
यह हार न केवल वोटरों के बदलते रुझान को दर्शाती है, बल्कि RJD के आंतरिक मतभेदों को भी उजागर करती है।
बिहार की 243 सीटों वाली विधानसभा में OBC और मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण विफल रहा, जिसका असर
परिवार के सदस्यों पर भी पड़ा।
रोहिणी का X पोस्ट: दो करीबियों पर साधा निशाना
15 नवंबर 2025 को सुबह रोहिणी आचार्य ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक लंबी पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने साफ कहा
कि वे राजनीति छोड़ रही हैं। पोस्ट में उन्होंने परिवार से दूरी बनाने का जिक्र किया और दो नामों—संजय यादव और
रमीज—का उल्लेख किया, जो तेजस्वी यादव के करीबी माने जाते हैं। रोहिणी ने दावा किया कि इन्हीं दो लोगों ने
उन्हें राजनीति से बाहर करने और परिवार से अलग होने की सलाह दी।
पोस्ट में रोहिणी ने लिखा, “मैंने फैसला लिया है कि अब राजनीति से दूर रहूंगी। परिवार से भी नाता तोड़ रही हूं,
क्योंकि कुछ लोग चाहते हैं कि मैं यहां न रहूं।” यह पोस्ट वायरल हो गई और हजारों रीट्वीट्स बटोर ली। सोशल
मीडिया पर लोग इसे यादव परिवार के फूट का सबूत बता रहे हैं। रोहिणी, जो सिंगापुर में डॉक्टर हैं, पहले भी सोशल
मीडिया के जरिए RJD के लिए सक्रिय रहीं, लेकिन अब यह प्लेटफॉर्म उनके विदाई का माध्यम बन गया।
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परिवारिक कलह का पुराना इतिहास: तेज प्रताप के बाद रोहिणी
यह पहली बार नहीं है जब लालू परिवार में दरारें दिखी हों। रोहिणी का फैसला उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव के
पार्टी से निष्कासन के बाद आया, जो कुछ महीनों पहले ही हुआ था। तेज प्रताप को कथित तौर पर पार्टी के फैसलों
से असहमति के कारण बाहर किया गया था। रोहिणी ने चुनाव से पहले भी परिवार और पार्टी के फैसलों पर सवाल
उठाए थे, जो मिश्रित संकेत दे रहे थे।
लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
दी है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि रोहिणी का यह कदम तेजस्वी के नेतृत्व को चुनौती दे सकता है।
परिवार के एक करीबी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह कलह लंबे समय से चल रही थी, लेकिन चुनावी
हार ने इसे भड़का दिया।” रोहिणी की पोस्ट में संजय यादव और रमीज को निशाना बनाना भी सवाल खड़ा
कर रहा है, क्योंकि ये दोनों तेजस्वी के विश्वासपात्र हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष ने RJD पर साधा निशाना
RJD के इस संकट पर विपक्ष ने तुरंत हमला बोला। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा, “परिवारवाद
की राजनीति का अंत हो गया।
RJD अब टूट चुकी है।” वहीं, जदयू के नेता ने इसे “आंतरिक साफ-सफाई” बताया। सोशल मीडिया पर
#RohiniQuits ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स परिवारवाद पर बहस कर रहे हैं।
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कांग्रेस और अन्य महागठबंधन सहयोगियों ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन सियासी जानकारों का अनुमान है
कि यह RJD की एकजुटता के लिए खतरे की घंटी है। बिहार की सियासत में यादव परिवार का दबदबा रहा
है, लेकिन अब नई पीढ़ी के फैसले पुरानी संरचना को चुनौती दे रहे हैं।
निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 के नतीजों ने RJD को न केवल सीटों की हार दी, बल्कि परिवारिक एकता पर भी प्रहार
किया। रोहिणी आचार्य का राजनीति छोड़ना और परिवार से दूरी बनाना यादव परिवार की सियासी विरासत
को नया मोड़ दे रहा है। यह घटना दर्शाती है कि राजनीति में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और आंतरिक कलह कैसे
पार्टी को कमजोर कर सकती हैं। RJD को अब तेजस्वी के नेतृत्व में एकजुट होने की जरूरत है, वरना विपक्ष
इसका फायदा उठा सकता है। बिहार की जनता के लिए यह एक सबक है कि सियासत परिवार से ऊपर है।
भविष्य में क्या होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल यह ऐलान सियासी हलचलों का केंद्र बना हुआ है।










