Bihar AI Cabinet Meeting: बिहार में नवगठित एनडीए सरकार ने मंगलवार को अपनी पहली कैबिनेट बैठक बुलाई, जिसमें छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन को हरी झंडी दिखाई गई। इसके अलावा, बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और 11 प्रमुख शहरों में आधुनिक टाउनशिप विकसित करने के प्रस्ताव भी पारित हो गए।

ये फैसले न केवल आर्थिक विकास को गति देंगे, बल्कि बेरोजगारी कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने
में भी मील का पत्थर साबित होंगे।
Bihar AI Cabinet Meeting: बिहार को डिजिटल क्रांति की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्लान
बैठक का सबसे चर्चित फैसला AI मिशन को मंजूरी देना रहा। राज्य सरकार ने ‘बिहार AI मिशन’ के तहत अगले पांच
वर्षों में 500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
इस मिशन का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासनिक सेवाओं में AI का उपयोग बढ़ाना है। उदाहरण के लिए,
किसानों को फसल सलाह देने के लिए AI आधारित ऐप विकसित किया जाएगा, जबकि अस्पतालों में रोग निदान के
लिए मशीन लर्निंग टूल्स लगाए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक के बाद कहा, “AI बिहार की युवा शक्ति को सही दिशा देगा। हमारा लक्ष्य है कि हर
जिले में AI सेंटर स्थापित हो, जहां स्थानीय युवा ट्रेनिंग लेकर स्टार्टअप शुरू कर सकें।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिहार में 50,000 से अधिक नौकरियां सृजित होंगी। मिशन की शुरुआत जनवरी
2026 से होगी, जिसमें आईआईटी पटना और आईआईएम बोधगया जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी की जाएगी।
चीनी मिलों का पुनर्वास: किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में कदम
बिहार में चीनी उद्योग लंबे समय से सुस्त पड़ा हुआ था। राज्य में करीब 9 मिलें बंद पड़ी हैं, जिनसे हजारों किसान
प्रभावित हैं। कैबिनेट ने 25 चीनी मिलों (बंद और पुरानी मिलें मिलाकर) को चालू करने का फैसला लिया।
इसके लिए 1,200 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज घोषित किया गया, जिसमें सब्सिडी, लोन गारंटी और तकनीकी
अपग्रेड शामिल हैं।
सीएम नीतीश ने जोर देकर कहा, “गन्ना किसान हमारा आधार हैं। बंद मिलों को फिर से चला कर हम न केवल रोजगार
बहाल करेंगे, बल्कि गन्ना उत्पादन को 30 प्रतिशत बढ़ाएंगे।” पहले चरण में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और दरभंगा की
मिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में 20,000 सीधी नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
नई नीति में पर्यावरण-अनुकूल तकनीक पर फोकस होगा, जैसे बायोगैस उत्पादन से मिल का कचरा उपयोगी बनाना।
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नए टाउनशिप: 11 शहरों में स्मार्ट सिटी का सपना साकार
शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने 11 शहरों—पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा, बिहारशरीफ,
बेगूसराय, सारण, सीवान, पूर्णिया और आरा—में आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की मंजूरी दी।
इन टाउनशिप में 50,000 एकड़ भूमि का उपयोग होगा, जहां आवास, व्यावसायिक केंद्र, पार्क और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर
बनाया जाएगा। अनुमानित लागत 5,000 करोड़ रुपये है, जो केंद्र सरकार की अमृत योजना से जुड़ेगी।
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया, “ये टाउनशिप माइग्रेशन रोकेंगी। यहां सस्ते घर, स्कूल और अस्पताल होंगे, जो
मध्यम वर्ग को आकर्षित करेंगे।” पहले चरण में पटना और मुजफ्फरपुर में काम शुरू होगा, जहां AI-सक्षम ट्रैफिक
मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाएगा। इससे शहरी बुनियादी ढांचे में क्रांति आएगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
बैठक के अन्य फैसले: शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी फोकस
कैबिनेट ने छह प्रस्तावों में से दो अन्य महत्वपूर्ण फैसलों पर भी सहमति जताई। पहला, ग्रामीण स्कूलों में डिजिटल
क्लासरूम स्थापित करने के लिए 300 करोड़ का प्रावधान। दूसरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में टेलीमेडिसिन सुविधा
बढ़ाने का प्लान। इनसे ग्रामीण युवाओं को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
निष्कर्ष
बिहार कैबिनेट की यह पहली बैठक राज्य के विकास की नई दिशा तय करने वाली साबित हुई। AI मिशन से तकनीकी
उन्नति, चीनी मिलों के पुनर्वास से कृषि मजबूती और टाउनशिप से शहरीकरण—ये सभी फैसले मिलकर बिहार को
आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने साफ संकेत
दिया है कि चुनावी वादों को अमल में लाने का समय आ गया है। अगर इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो
बिहार न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा, बल्कि युवाओं के सपनों का भी नया ठिकाना बनेगा। बिहार आगे बढ़े,
यही सबकी कामना है!





