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Mahua Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में महुआ सीट ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संजय कुमार सिंह ने 87,000 से ज्यादा वोटों के साथ शानदार जीत दर्ज की, जो RJD के मुकेश कुमार रौशन से 44,997 वोटों का अंतर है। लेकिन सबसे बड़ा झटका लगा तेज प्रताप यादव को—जिनकी जनशक्ति जनता दल (JJD) ने यहां तीसरा स्थान हासिल किया, लगभग 35,000 वोटों के साथ। LJP उम्मीदवार से वे करीब 52,000 वोट पीछे रहे। 2015 में इसी सीट से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले लालू परिवार के बड़े बेटे की यह हार न सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान है, बल्कि परिवार के राजनीतिक समीकरण को भी हिला देगी।

आइए, इस त्रिकोणीय मुकाबले की पूरी कहानी को बारीकी से समझते हैं—कैसे वोटों का बंटवारा तेज प्रताप को तीसरे पायदान पर धकेल गया और NDA की लहर ने क्या कमाल दिखाया।
Mahua Result 2025: यादव परिवार का गढ़, लेकिन बिखरा वोट बैंक
महुआ वैशाली जिले की एक प्रमुख विधानसभा सीट है, जहां कुल 2.8 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण यहां हमेशा हावी रहा, लेकिन 6 नवंबर को पहले चरण में 65.2% वोटिंग के बाद तस्वीर बदल गई। 2015 में तेज प्रताप ने RJD टिकट पर 66,927 वोट (43.3%) लेकर जीत हासिल की थी, लेकिन 2020 में वे हसनपुर चले गए और RJD ने मुकेश रौशन को 62,580 वोटों से जिताया।
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इस बार मुकाबला त्रिकोणीय था: तेज प्रताप (JJD), मुकेश रौशन (RJD) और संजय कुमार सिंह (LJP-RV)। तेज प्रताप को RJD से निष्कासित होने के बाद अपनी नई पार्टी JJD से यहां उतारा गया था, जो यादव वोट काटने की कोशिश थी। लेकिन NDA की लहर और LJP की दलित-ईबीसी अपील ने खेल पलट दिया। एग्जिट पोल्स ने RJD को हल्की बढ़त दी थी, लेकिन रुझानों ने सब उलट दिया। मुद्दे? बेरोजगारी, बाढ़ और सुशासन—जिनमें NDA ने बाजी मारी।
मिनट-टू-मिनट काउंटिंग अपडेट्स: तेज प्रताप की उम्मीदें धूमिल
काउंटिंग सुबह 8 बजे राज नारायण कॉलेज, हाजीपुर में शुरू हुई। महुआ के सेंटर पर सख्त सुरक्षा, और बाहर
JJD-RJD कार्यकर्ता टकराव की कगार पर। यहां राउंड-वाइज झलक:
8:30 AM (राउंड 1-5): शुरुआती रुझान LJP के पक्ष में। संजय सिंह 12,897 वोटों से आगे, रौशन 8,794 पर।
तेज प्रताप चौथे नंबर पर 4,500 वोटों के साथ। JJD खेमे में चिंता—तेज प्रताप ने कहा, “जनता का फैसला अंतिम।”
9:30 AM (राउंड 6-10): LJP की बढ़त 22,703 तक। रौशन 18,000 पर दूसरे, तेज प्रताप 16,522 पर तीसरे।
AIMIM के अमित कुमार 10,563 पर चौथे। यादव वोट बंटने का असर साफ।
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10:30 AM (राउंड 11-15): संजय सिंह 43,654 पर, रौशन 24,480। तेज प्रताप 25,474 पर अटके, लेकिन पीछे
18,000+। सोशल मीडिया पर #TejPratapDefeat ट्रेंड।
11:30 AM (राउंड 16-20): LJP 63,117 तक पहुंचा, रौशन 31,287। तेज प्रताप 25,474 पर सिमटे, पीछे 37,643।
तेज प्रताप ने हार स्वीकार की: “यह सुशासन की जीत है।”
12:30 PM (राउंड 21-25): फाइनल मोड़। संजय सिंह 78,286 पर, रौशन 39,582। तेज प्रताप 35,000 के आसपास,
पीछे 43,286। ECI ने कहा, “2 राउंड बाकी।”
1:30 PM (राउंड 26-28): अंतिम राउंड। LJP 87,000+ पर विजयी। तेज प्रताप तीसरे पर 35,000 वोट, 52,000+ पीछे।
JJD का वोट शेयर 12% रहा।
ये अपडेट्स ECI के आधिकारिक डेटा पर आधारित। कुल 28 राउंड में LJP ने 45,000+ मार्जिन से जीत ली।
उम्मीदवारों का स्कोरकार्ड: LJP का जलवा, JJD का फ्लॉप
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट | स्थिति |
|---|---|---|---|
| संजय कुमार सिंह | LJP(RV) | 87,000+ | विजयी, 44,997 मार्जिन |
| मुकेश कुमार रौशन | RJD | 42,000+ | दूसरे, यादव वोट बंटा |
| तेज प्रताप यादव | JJD | 35,000 | तीसरे, 52,000 पीछे |
| अमित कुमार | AIMIM | 13,000+ | चौथे, अल्प प्रभाव |
LJP का वोट शेयर 48%+, RJD 23%, JJD 12%। दलित-ईबीसी वोटों ने LJP को बूस्ट दिया, जबकि यादव वोट
(40% आबादी) बंट गया—RJD 20%, JJD 12%।
हार के पीछे की वजहें: वोट स्प्लिट और NDA की एकजुटता
तेज प्रताप की हार कई कारणों से आई। पहला, RJD से निष्कासन—2024 में सोशल मीडिया पोस्ट के बाद परिवार ने उन्हें अलग
थलग किया, जो वोटरों को भ्रमित करने वाला साबित हुआ। दूसरा, JJD का कमजोर संगठन—43 सीटों पर लड़े, लेकिन महुआ में
भी सिर्फ 35,000 वोट। तीसरा, NDA की लहर—LJP ने चिराग पासवान की अपील से दलितों को लामबंद किया। चौथा, स्थानीय
मुद्दे—बाढ़ राहत में NDA की त्वरित कार्रवाई ने ग्रामीणों को प्रभावित किया। तेज प्रताप ने हार मानते हुए कहा, “यह परिवारवाद
पर सुशासन की जीत है।” लेकिन विश्लेषक कहते हैं, यादव वोट का बंटवारा MGB को महंगा पड़ा।
निष्कर्ष: महुआ की हार—लालू परिवार को सबक, NDA का दबदबा
महुआ 2025 ने साबित कर दिया कि राजनीति में विरासत अकेले काफी नहीं—संगठन और मुद्दों की जरूरत है। तेज प्रताप की
52,000 वोटों वाली हार लालू परिवार के लिए आत्मचिंतन का संकेत है, जबकि LJP की जीत चिराग पासवान को NDA में
मजबूत बनाती है। बिहार की कुल 208 सीटों वाली NDA जीत में यह सीट छोटा लेकिन प्रतीकात्मक हिस्सा। अब सवाल—
क्या JJD 2030 तक खड़ी हो पाएगी? अगर तेज प्रताप युवाओं पर फोकस करें, तो हां। यह नतीजे विकास की प्राथमिकता
को रेखांकित करते हैं, लेकिन विपक्ष को एकजुट होने की सीख भी देते हैं।











