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Madan Sahni Net Worth: बिहार की राजनीति में मदन साहनी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में लिया जाता है, जो पंचायत स्तर से उठकर विधानसभा तक पहुंचे और अब सामाजिक कल्याण विभाग की कमान संभाल रहे हैं। दरभंगा जिले के बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक चुने गए साहनी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी अपनी सीट बरकरार रखते हुए नीतीश कुमार सरकार में मंत्री बने। लेकिन सवाल यह है कि एक ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले मल्लाह समुदाय के नेता ने आज करोड़ों की संपत्ति कैसे खड़ी की? चुनावी हलफनामों, सार्वजनिक दस्तावेजों और हालिया रिपोर्ट्स के आधार पर हम यहां उनकी प्रोफाइल, राजनीतिक सफर और संपत्ति का विस्तृत विवरण दे रहे हैं।

ये आंकड़े मुख्य रूप से 2020-2025 के बीच के हलफनामों और ADR (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) की
रिपोर्ट्स से लिए गए हैं, जो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
Madan Sahni Net Worth: मदन साहनी का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
मदन साहनी का जन्म 1967 में दरभंगा जिले के एक साधारण मल्लाह परिवार में हुआ। वे स्वर्गीय विनेश्वर साहनी के
बेटे हैं, जो स्थानीय स्तर पर सामाजिक कार्यों से जुड़े थे। ग्रामीण बिहार की कठिनाइयों के बीच पले-बढ़े साहनी ने अपनी
शिक्षा लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली से 1989 में शास्त्री (ग्रेजुएट) की डिग्री पूरी की। यह डिग्री
संस्कृत और पारंपरिक ज्ञान पर केंद्रित थी, जो उनके सामाजिक कार्यों की नींव बनी। शुरुआती दिनों में वे परिवार के साथ
नदी-घाटों पर जुड़े रहे, लेकिन जल्द ही राजनीति और सामाजिक सेवा की ओर मुड़े।
उनकी पत्नी का पेशा व्यवसाय से जुड़ा है, जो परिवार की आर्थिक स्थिरता में सहायक रहा। साहनी की उम्र 58 वर्ष है
और वे बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता संख्या 802 पर दर्ज हैं।
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राजनीतिक सफर: पंचायत से मंत्री तक का संघर्षपूर्ण रास्ता
मदन साहनी की राजनीति की शुरुआत 1990 के दशक में पंचायत स्तर से हुई। वे जिला परिषद सदस्य चुने गए और फिर
जिला बोर्ड चेयरमैन बने। उनकी जमीनी समझ और सामाजिक कार्यों – जैसे गरीबों के लिए आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य
कैंप – ने उन्हें JD(U) का टिकट दिलाया। 2010 में पहली बार बहादुरपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
2015 में गौरा-बौराम सीट से जीत हासिल की, जहां उन्होंने 20,000 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। 2020 में वापस
बहादुरपुर लौटे और RJD के रमेश चौधरी को 2,600 वोटों से हराया।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी वे बहादुरपुर से JD(U) के टिकट पर लड़े और RJD के भोला यादव को 8,600
वोटों से पीछे छोड़कर जीते।
नीतीश कुमार सरकार में 2020 से सामाजिक कल्याण मंत्री हैं, जहां उन्होंने वृद्धाश्रम, अनाथालय और दिव्यांग कल्याण
योजनाओं पर फोकस किया। 20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार के 10वें शपथग्रहण में वे फिर मंत्री बने।
JD(U) में वे मल्लाह और EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) समुदाय के प्रतिनिधि हैं। उनकी ताकत दरभंगा और सीमांचल के
वोट बैंक में है। हालांकि, 2022 में विपक्ष ने उनके विभागीय टेंडरों पर सवाल उठाए, लेकिन कोर्ट में साफ हो गया।
कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं है।
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संपत्ति का विस्तृत ब्रेकडाउन: 2025 हलफनामे से आंकड़े
2020 के हलफनामे के अनुसार, मदन साहनी की कुल संपत्ति लगभग 2 करोड़ रुपये थी – जिसमें 1.1 करोड़ चल संपत्ति
और 93.2 लाख अचल संपत्ति शामिल थी। 2025 के चुनावी हलफनामे और वार्षिक संपत्ति घोषणा में यह बढ़कर करीब
2.5 करोड़ रुपये हो गई, जो मुख्य रूप से भूमि मूल्यांकन और निवेश से जुड़ी लगती है।
ADR की रिपोर्ट्स से पुष्टि होती है कि वृद्धि वैध स्रोतों से हुई। आइए, हिसाब देखें:
चल संपत्ति (Movable Assets): लगभग 1.3 करोड़ रुपये। इसमें कैश (करीब 5-10 लाख), बैंक बैलेंस, शेयर,
म्यूचुअल फंड और गोल्ड ज्वेलरी (200-300 ग्राम) शामिल हैं। पत्नी की चल संपत्ति भी जोड़ी गई, जो व्यवसाय से जुड़ी है।
अचल संपत्ति (Immovable Assets): करीब 1.2 करोड़ रुपये। दरभंगा में कृषि भूमि (5-7 एकड़), मकान और
प्लॉट। 2020 से 2025 के बीच मूल्यांकन में 15-20% की बढ़ोतरी हुई, जो सरकारी विकास योजनाओं से प्रभावित
लगती है।
वाहन और अन्य: दो कारें (SUV और सेडान, कुल मूल्य 25-30 लाख) और एक ट्रैक्टर। कोई हथियार या लग्जरी
आइटम नहीं।
कर्ज (Liabilities): 20-25 लाख रुपये। बैंक लोन मुख्य रूप से कृषि और घरेलू खर्च के लिए। कोई डिफॉल्ट नहीं।
आय स्रोत: सालाना आय 15-20 लाख रुपये। इसमें विधायक/मंत्री वेतन (10-12 लाख), कृषि आय (3-5 लाख)
और पत्नी के व्यवसाय से कमाई शामिल।
ये आंकड़े मायनेटा.इन और चुनाव आयोग के हलफनामों से हैं। बिहार के औसत विधायकों की संपत्ति (3.35 करोड़)
से कम है, लेकिन ग्रामीण नेता के लिए ऊंची।
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संपत्ति पर उठे सवाल: पारदर्शिता की कसौटी
मदन साहनी की दौलत को लेकर विपक्ष ने कभी-कभी सवाल उठाए, खासकर सामाजिक कल्याण विभाग के बजट
आवंटन पर। लेकिन हलफनामों में सब स्पष्ट है – कोई छिपी संपत्ति या अनियमितता नहीं। उनकी आय मुख्य रूप से
वैध स्रोतों से है, जो बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रतिबिंबित करती है। राजनीति में EBC नेताओं पर ऐसे आरोप
आम हैं, लेकिन साहनी ने हमेशा दस्तावेजों से जवाब दिया।
बिहार कैबिनेट में मदन साहनी की भूमिका: सामाजिक कल्याण विभाग
20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA सरकार में साहनी को फिर सामाजिक कल्याण विभाग सौंपा
गया। NDA की 202 सीटों वाली जीत में JD(U) को 9 मंत्रालय मिले।
साहनी ने कहा, “दरभंगा के गरीबों को नई योजनाओं से जोड़ेंगे।” उनकी नियुक्ति EBC प्रतिनिधित्व और नीतीश की
सामाजिक न्याय रणनीति का हिस्सा है। विभाग में वृद्धा पेंशन और दिव्यांग सहायता पर फोकस रहेगा।
निष्कर्ष
मदन साहनी की प्रोफाइल बिहार की राजनीति का एक सच्चा चित्रण है – पंचायत से मंत्री तक का सफर, जो मेहनत
और जनसेवा पर टिका है। 2.5 करोड़ की संपत्ति उनकी प्रगति का प्रमाण है, लेकिन पारदर्शिता ही उनकी सबसे बड़ी
पूंजी बनी रहेगी। अगर वे सामाजिक कल्याण में और सुधार लाते हैं, तो दरभंगा से लेकर पूरे बिहार तक असर दिखेगा।
बिहार को ऐसे नेताओं की दरकार है जो जमीनी मुद्दों को हल करें, न कि विवादों का शिकार बनें। जनता अब देख रही
है कि क्या यह दौलत कल्याणकारी बनेगी।










