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Leshi Singh Net Worth: बिहार की राजनीति में लेशी सिंह का नाम एक ऐसी महिला शक्ति के रूप में लिया जाता है, जो विधवा बनने के बाद भी अपने क्षेत्र की धुरी बनी रहीं। पूर्णिया जिले के धमदाहा विधानसभा क्षेत्र से 6 बार विधायक चुनी गईं लेशी सिंह अब नीतीश कुमार सरकार में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा और पप्पू यादव जैसे दिग्गजों को एक साथ हराकर अपनी पकड़ मजबूत की।

लेकिन सवाल यह है कि एक ग्रामीण पृष्ठभूमि वाली महिला, जो 12वीं पास हैं, ने इतनी संपत्ति कैसे जमा की? चुनावी
हलफनामों और सार्वजनिक दस्तावेजों के आधार पर हम यहां उनकी आय, संपत्ति और राजनीतिक सफर का ब्योरा
दे रहे हैं। ये आंकड़े 2020 से 2025 के बीच के हलफनामों से लिए गए हैं, जो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
Leshi Singh Net Worth: आय, संपत्ति और प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
लेशी सिंह का जन्म 1974 के आसपास पूर्णिया जिले के सर्षी गांव में हुआ। वे राजपूत समुदाय की बनौत वंश से ताल्लुक
रखती हैं। उनकी शिक्षा बिहार इंटरमीडिएट एजुकेशन, पटना से 12वीं पास (आईए पास) तक सीमित रही, जो 1993 में
पूरी हुई। ग्रामीण बिहार की सीमांचल क्षेत्र में पलकर वे सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से रूबरू हुईं। उनकी शादी 2000
से पहले मधुसूदन सिंह उर्फ बूटन सिंह से हुई, जो समता पार्टी के पूर्णिया जिला प्रमुख और स्थानीय प्रभावशाली नेता थे।
बूटन सिंह की 2000 में हत्या हो गई, जिसके बाद लेशी सिंह ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उनके दो बेटे हैं, जिनमें से
एक राजनीति में रुचि रखता है। परिवार की आय मुख्य रूप से कृषि, परिवहन (ट्रक) और सरकारी सुविधाओं से जुड़ी है।
लेशी सिंह ने कभी कोई निजी नौकरी नहीं की, बल्कि परिवार के ग्रामीण व्यवसायों को संभाला।
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राजनीतिक सफर: विधवा से मंत्री तक की दास्तान
लेशी सिंह की राजनीति में एंट्री 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव से हुई, जब उन्होंने जेडीयू के टिकट पर धमदाहा से जीत
हासिल की। यह उनकी राजनीतिक विरासत थी – पति बूटन सिंह के प्रभाव को आगे बढ़ाते हुए। 2015 और 2020 में भी
वे लगातार जीतीं। 2022 में नीतीश कुमार ने उन्हें बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बनाया, जो महिलाओं के मुद्दों
पर उनकी सक्रियता को दर्शाता है। 2025 के चुनाव में धमदाहा सीट पर जेडीयू ने उन्हें फिर मैदान में उतारा। यहां विपक्ष
ने संतोष कुशवाहा (पूर्व जेडीयू सांसद) और पप्पू यादव (इंडिपेंडेंट) को एकजुट किया, लेकिन लेशी सिंह ने भारी मतों से
जीत दर्ज की। नतीजा? नवंबर 2025 में नीतीश कुमार के 10वें शपथग्रहण में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
वे जेडीयू की वरिष्ठ नेता हैं, जो सीमांचल में पार्टी की मजबूत लॉबी का चेहरा हैं। उनके राजनीतिक सफर में जातिगत
समीकरण, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय मुद्दे प्रमुख रहे। हालांकि, 2022 में जेडीयू की ही बीमा भारती ने उन पर
हत्या के पुराने मामलों के आरोप लगाए, जिसका लेशी ने खारिज किया और 5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा।
कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं है।
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संपत्ति का विस्तृत ब्रेकडाउन: 2025 हलफनामे से आंकड़े
2025 बिहार विधानसभा चुनाव के हलफनामे के अनुसार, लेशी सिंह की कुल संपत्ति 2.2 करोड़ रुपये है। यह 2020
के 2 करोड़ से थोड़ी बढ़ी हुई है, जो मुख्य रूप से भूमि मूल्यांकन और निवेश से जुड़ी लगती है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के आंकड़ों से पुष्टि होती है कि उनकी संपत्ति पारदर्शी है। आइए, हिसाब देखें:
चल संपत्ति (Movable Assets): करीब 50-60 लाख रुपये। इसमें कैश, बैंक बैलेंस, गोल्ड ज्वेलरी (लगभग 500-
600 ग्राम), बीमा पॉलिसी और शेयर शामिल हैं। खासकर बीमा में लाखों का निवेश है, जो परिवार की सुरक्षा के लिए है।
अचल संपत्ति (Immovable Assets): लगभग 1.6 करोड़ रुपये। इसमें पूर्णिया में कृषि भूमि, मकान और प्लॉट
आते हैं। परिवार के ग्रामीण व्यवसाय से जुड़ी ये संपत्तियां मूल्य में 10-15% बढ़ी हैं।
वाहन और हथियार: तीन लग्जरी कारें, दो ट्रक (परिवहन व्यवसाय के लिए)। साथ ही एक राइफल और एक गन, जो
सुरक्षा के लिए हैं। कुल वाहनों का मूल्य 20-25 लाख रुपये।
कर्ज (Liabilities): 44.5 लाख रुपये। यह बैंक लोन से जुड़ा है, जो व्यवसाय विस्तार के लिए लिया गया। कोई
डिफॉल्ट नहीं।
आय स्रोत: सालाना आय 15-20 लाख रुपये। इसमें विधायक भत्ता (10-12 लाख), कृषि आय (3-5 लाख),
किराया और ट्रक व्यवसाय से कमाई शामिल। पति की मृत्यु के बाद परिवार के व्यवसाय ने आय को स्थिर रखा।
पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों की आय अलग से जोड़ी गई है।
ये आंकड़े चुनाव आयोग के हलफनामों से हैं, जहां कोई अनियमितता नहीं दिखी। लेशी सिंह की संपत्ति ग्रामीण
बिहार के औसत से ऊपर है, लेकिन बिहार के करोड़पति उम्मीदवारों (जैसे 368 करोड़ वाले) से काफी कम।
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संपत्ति पर उठे सवाल: पारदर्शिता की चुनौती
लेशी सिंह की दौलत को लेकर विपक्ष ने कभी-कभी सवाल उठाए, खासकर 2022 के आरोपों के बाद। लेकिन हलफनामों
में सब कुछ स्पष्ट है – कोई छिपी संपत्ति या आयकर मुद्दा नहीं। उनकी आय मुख्य रूप से वैध स्रोतों से है, जो बिहार की
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दर्शाती है।
फिर भी, राजनीति में महिलाओं पर संपत्ति के नाम पर हमले आम हैं, जो लेशी ने हमेशा सबूतों से जवाब दिया।
बिहार कैबिनेट में लेशी सिंह की भूमिका: खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग
2025 के चुनाव के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में लेशी सिंह को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग
सौंपा गया। वे सप्लाई चेन, राशन वितरण और उपभोक्ता अधिकारों पर फोकस कर रही हैं। सीमांचल के मुद्दों – जैसे बाढ़
प्रभावित क्षेत्रों में खाद्यान्न वितरण – को प्राथमिकता दे रही हैं।
उनकी नियुक्ति जेडीयू की महिला प्रतिनिधित्व रणनीति का हिस्सा है।
निष्कर्ष
लेशी सिंह की कहानी बिहार की एक साधारण महिला की असाधारण यात्रा है – पति की हत्या से उबरकर राजनीति में
मजबूत पकड़ बनाने वाली। 2.2 करोड़ की संपत्ति उनकी मेहनत, परिवार के व्यवसाय और राजनीतिक स्थिरता का प्रमाण
है। लेकिन असली ताकत उनकी लोकप्रियता में है, जो 2025 की जीत से साबित हुई।
भविष्य में अगर वे विभागीय सुधार लाती हैं, तो सीमांचल का विकास नई ऊंचाइयों को छुएगा। बिहार की राजनीति में
ऐसी महिलाओं की जरूरत है, जो चुनौतियों से लड़ें और पारदर्शिता बनाए रखें। जनता को अब देखना है कि क्या यह
दौलत विकास के लिए इस्तेमाल होगी।










