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हैदराबाद डॉक्टर ड्रग्स रैकेट: सफेद कोट के पीछे काला कारोबार! हैदराबाद में डॉक्टर के घर से ड्रग्स रैकेट का खुलासा

On: November 4, 2025 12:21 PM
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हैदराबाद डॉक्टर ड्रग्स रैकेट
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हैदराबाद डॉक्टर ड्रग्स रैकेट: हैदराबाद की चमचमाती सड़कों और हाई-राइज इमारतों के पीछे एक ऐसा अंधेरा कारोबार फल-फूल रहा था, जहां सफेद कोट पहनने वाले डॉक्टर ने अपना घर मौत का बाजार बना लिया। कल्पना कीजिए, एक मरीजों का इलाज करने वाला हाथ उसी जहर को बांट रहा हो, जो समाज की नींव हिला दे। तेलंगाना की राजधानी में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 3 नवंबर 2025 को मुशीराबाद इलाके में एक पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टर जॉन पॉल के किराए के फ्लैट पर दबिश देकर पूरे शहर में फैले ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। यह घटना न सिर्फ कानून की नजरों में अपराध है, बल्कि एक चेतावनी भी कि नशे का साया अब डॉक्टरी की पवित्रता तक पहुंच चुका है।

हैदराबाद डॉक्टर ड्रग्स रैकेट
हैदराबाद डॉक्टर ड्रग्स रैकेट

आइए, इस कांड की परतें खोलें और समझें कि कैसे एक सम्मानित पेशा काले धंधे की भेंट चढ़ गया।

हैदराबाद डॉक्टर ड्रग्स रैकेट: सफेद कोट की आड़ में काला खेल: डॉक्टर जॉन पॉल का दोहरा चरित्र

हैदराबाद के मुशीराबाद इलाके में स्थित एक साधारण-सी दिखने वाली इमारत के अंदर छिपा था एक खतरनाक राज

डॉक्टर जॉन पॉल, जो एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज से पोस्ट-ग्रेजुएट हैं, ने अपने दोस्तों—तीन करीबी साथियों—के

साथ मिलकर इस फ्लैट को ड्रग्स के वितरण केंद्र में तब्दील कर दिया था। STF की टीम ने छापेमारी के दौरान नशीले

पदार्थों की भारी मात्रा बरामद की, जिनमें कोकीन, हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स शामिल थे। अनुमान है कि इस रैकेट

की वैल्यू करोड़ों में थी, जो शहर के विभिन्न हिस्सों—हाई-प्रोफाइल पब्स, आईटी हब्स और यहां तक कि मेडिकल

सर्कल तक—फैली हुई थी।

जांच एजेंसी के मुताबिक, जॉन पॉल का मेडिकल बैकग्राउंड ही इस कारोबार की सबसे बड़ी ताकत था। वह न सिर्फ

सप्लाई चेन को मैनेज करता था, बल्कि ड्रग्स को मेडिकल सैंपल्स के रूप में छिपाकर ट्रांसपोर्ट भी करवाता था।

उसके दोस्त, जो आईटी सेक्टर और लोकल बिजनेस से जुड़े थे, ग्राहकों का नेटवर्क संभालते थे। STF ने बताया कि

यह फ्लैट कोई साधारण स्टोरेज पॉइंट नहीं, बल्कि पूरा ऑपरेशन हब था, जहां पैकिंग से लेकर डिलीवरी तक सब

कुछ होता था। लेकिन सवाल उठता है—कैसे एक पढ़े-लिखे डॉक्टर ने ऐसा रास्ता चुना? प्रारंभिक पूछताछ में सामने

आया कि आर्थिक तंगी और नशे की लत ने उसे इस दलदल में धकेल दिया।

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STF की लोहे की मुट्ठी: कैसे फटा यह काला साम्राज्य?

3 नवंबर की रात STF को एक गुप्त टिप मिली, जिसके आधार पर टीम ने फ्लैट पर धावा बोल दिया। दरवाजा तोड़ते

ही अंदर का नजारा देखकर सब सन्न रह गए—टेबलों पर बिखरे नशीले पैकेट, वजन करने के स्केल, मोबाइल फोन

और डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड। छापे में जॉन पॉल और उसके दो दोस्त मौके पर पकड़े गए, लेकिन तीसरा साथी

फरार हो गया। पुलिस अब उसके पीछे लगी हुई है, और संदेह है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ा हो सकता

है, क्योंकि कुछ चैट्स में नाइजीरियन कनेक्शन का जिक्र मिला।

यह कार्रवाई तेलंगाना एंटी-नारकोटिक्स ब्यूरो (TGNAB) की लगातार निगरानी का नतीजा है। हाल के महीनों में

हैदराबाद में कई ड्रग्स रैकेट्स फूटे हैं—जैसे जुलाई में एक इंजीनियर द्वारा सैंडल की हील में कोकीन छिपाकर सप्लाई

का मामला, या सितंबर में एक स्कूल की आड़ में अल्प्राजोलम फैक्ट्री। लेकिन इस बार डॉक्टर का शामिल होना ने पूरे

मेडिकल फ्रेटर्निटी को हिलाकर रख दिया। STF के डीसीपी ने कहा, “यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सिस्टम पर

सवाल है। हम अब सभी मेडिकल प्रोफेशनल्स की स्क्रीनिंग बढ़ाएंगे।”

ड्रग्स का जाल: शहर के अमीर तबके से कैसे जुड़ा था यह रैकेट?

हैदराबाद, जो आईटी और बॉलीवुड का हॉटस्पॉट है, वहां ड्रग्स का बाजार तेजी से फैल रहा है। जॉन पॉल का नेटवर्क

खासतौर पर हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स को टारगेट करता था—सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स, पब ओनर्स, जिम ट्रेनर्स और यहां

तक कि कुछ सहकर्मी डॉक्टर। व्हाट्सऐप ग्रुप्स और UPI ट्रांसफर्स से पेमेंट्स होते थे, जो ट्रेस करना मुश्किल बनाता था।

छापे से बरामद डेटा में 50 से ज्यादा कस्टमर्स के नाम मिले, जिनमें से कई अब पूछताछ के दायरे में हैं।

यह रैकेट पिछले दो साल से सक्रिय था, और कोविड के बाद बढ़ी स्ट्रेस को इसका बहाना बनाया गया। लेकिन असल में,

यह शहर की चकाचौंध वाली जिंदगी का काला चेहरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल प्रोफेशन में ड्रग्स का इस्तेमाल

अब ‘पर्फॉर्मेंस एनहांसर’ के रूप में हो रहा है, जो लत में बदल जाता है। STF की यह कार्रवाई न सिर्फ सप्लाई रोकेगी,

बल्कि डिमांड पर भी लगाम लगाएगी।

समाज पर असर: नशे की लत कैसे चुरा रही है नई पीढ़ी?

इस कांड ने हैदराबाद के युवाओं को झकझोर दिया है। हर साल सैकड़ों केस नशे से जुड़ी मौतों के आते हैं, और डॉक्टर

जैसे रोल मॉडल का फंसना तो और भी खतरनाक है। परिवार टूट रहे हैं, करियर बर्बाद हो रहे हैं। लेकिन सकारात्मक पक्ष

यह है कि पुलिस अब जागरूकता कैंपेन चला रही है—स्कूलों में सेशन, पब्स में चेकिंग और ऐप्स पर मॉनिटरिंग।

यह रैकेट फूटने से कई परिवारों को समय पर बचा लिया गया, क्योंकि कई क्लाइंट्स अब काउंसलिंग की ओर बढ़ रहे हैं।

निष्कर्ष: जहर के सौदागरों पर लगाम लगाने का समय

डॉक्टर जॉन पॉल के घर से फूटा यह ड्रग्स रैकेट साबित करता है कि अपराध का कोई चेहरा नहीं होता—यह सम्मानित

कोट के पीछे भी छिप सकता है। STF की बहादुरी ने न सिर्फ एक साम्राज्य तोड़ा, बल्कि समाज को आईना भी दिखाया।

लेकिन असली लड़ाई तो अभी बाकी है—नशे की जड़ें गहरी हैं, और इन्हें उखाड़ने के लिए सरकार, पुलिस और नागरिकों

का एकजुट होना जरूरी है। चलिए, हम सब मिलकर एक नशा-मुक्त हैदराबाद बनाएं, जहां सफेद कोट सिर्फ जीवन बचाने

का प्रतीक हो, मौत बांटने का नहीं।

FAQ: हैदराबाद डॉक्टर ड्रग्स रैकेट से जुड़े सवालों के जवाब

1. डॉक्टर जॉन पॉल कौन हैं और उनका रैकेट कैसे चल रहा था? जॉन पॉल एक पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टर हैं,

जिन्होंने मुशीराबाद के फ्लैट को ड्रग्स वितरण केंद्र बनाया। उनके दोस्तों की मदद से कोकीन और अन्य नशीले

पदार्थ शहर भर में बेचे जाते थे।

2. STF ने क्या-क्या बरामद किया छापे में? नशीले पदार्थों की भारी मात्रा, पैकिंग मटेरियल, मोबाइल फोन

और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद हुए, जिनकी वैल्यू करोड़ों में आंकी जा रही है।

3. क्या यह रैकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ा था? हां, चैट्स से नाइजीरियन कनेक्शन का संकेत मिला है।

फरार आरोपी की तलाश में जांच जारी है।

4. इस कांड से हैदराबाद के युवाओं पर क्या असर पड़ेगा? यह जागरूकता फैलाएगा और पुलिस की

चेकिंग बढ़ाएगी, जिससे नशे की सप्लाई कम हो सकती है, लेकिन परिवारों को सतर्क रहना होगा।

5. आगे क्या कार्रवाई होगी? STF सभी संदिग्ध क्लाइंट्स की जांच करेगी और मेडिकल प्रोफेशनल्स पर

नजर रखेगी। जागरूकता कैंपेन भी शुरू होंगे।

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