Gorakhpur Forest University: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले को एक बड़ा तोहफा मिलने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शिता से यहां उत्तर भारत का पहला और देश का दूसरा समर्पित वन विश्वविद्यालय स्थापित होने जा रहा है। यह विश्वविद्यालय वानिकी, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण विज्ञान में विशेषज्ञता प्रदान करेगा।

20 दिसंबर 2025 की तारीख में यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जो पूर्वांचल के युवाओं के लिए नए अवसर
खोलेगी और पर्यावरण शिक्षा को नई ऊंचाइयां देगी।
Gorakhpur Forest University: विश्वविद्यालय की शुरुआत और पृष्ठभूमि
यह विचार सबसे पहले 6 सितंबर 2024 को सामने आया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के कैम्पियरगंज
में विश्व के पहले जटायु (रेड-हेडेड वल्चर) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र का उद्घाटन किया।
इसी मौके पर उन्होंने वानिकी कॉलेज की घोषणा की, जो बाद में पूर्ण विश्वविद्यालय में अपग्रेड हो गई।
वन विभाग ने जटायु केंद्र के पास ही लगभग 125 एकड़ (कुछ रिपोर्ट्स में 50 हेक्टेयर) भूमि चिन्हित की है। राज्य सरकार
ने भूमि आवंटन को मंजूरी दे दी है और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है।
विश्वविद्यालय अधिनियम का ड्राफ्ट भी अंतिम चरण में है। 2025-26 के बजट में इसके लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किए
गए हैं, जबकि कुल लागत लगभग 500-621 करोड़ रुपये अनुमानित है।
यह विश्वविद्यालय उत्तर भारत का पहला समर्पित वानिकी संस्थान होगा। देश में पहला ऐसा विश्वविद्यालय तेलंगाना में है,
जबकि विश्व स्तर पर रूस और चीन के बाद यह चौथा होगा।
विश्वविद्यालय की विशेषताएं और सुविधाएं
विश्वविद्यालय का कैंपस जटायु संरक्षण केंद्र के निकट विकसित किया जाएगा, जो पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए
आदर्श स्थान है। यहां निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:
- लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल (करीब 500 छात्रों की क्षमता)।
- आधुनिक प्रयोगशालाएं, क्लासरूम, ऑडिटोरियम और खेल मैदान।
- फैकल्टी और स्टाफ के लिए आवास।
- फील्ड-बेस्ड रिसर्च और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की व्यवस्था, जहां छात्र वनों और संरक्षण क्षेत्रों में hands-on अनुभव प्राप्त करेंगे।
पाठ्यक्रम में वानिकी, एग्रोफॉरेस्ट्री, सोशल फॉरेस्ट्री, उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर), वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और
बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषय शामिल होंगे। डिग्री, डिप्लोमा और पीएचडी स्तर के कोर्स चलाए जाएंगे।
यह संस्थान न केवल भारतीय छात्रों बल्कि अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं को भी आकर्षित करेगा।
पर्यावरण शिक्षा और संरक्षण में महत्व
आज की सबसे बड़ी चुनौतियां जलवायु परिवर्तन, वन क्षेत्र का ह्रास और जैव विविधता की क्षति हैं। यह विश्वविद्यालय कुशल
मानव संसाधन तैयार करेगा, जो वनों की रक्षा, सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा। पूर्वांचल जैसे क्षेत्र में जहां
कृषि और वन दोनों महत्वपूर्ण हैं, एग्रोफॉरेस्ट्री जैसे कोर्स किसानों और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेंगे।
गोरखपुर पहले से ही शिक्षा का केंद्र है – दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
आदि। यह नया विश्वविद्यालय इसे पर्यावरण शिक्षा का हब बनाएगा।
निष्कर्ष
गोरखपुर में स्थापित होने वाला वन एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह न
केवल उत्तर भारत की पहली ऐसी संस्था होगी बल्कि देश के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ की यह पहल पूर्वांचल के युवाओं को विश्व स्तरीय शिक्षा और रोजगार प्रदान करेगी। आने वाले वर्षों में यह संस्थान
भारत की हरित क्रांति का प्रतीक बनेगा।