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यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द: उत्तर प्रदेश में सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) भर्ती परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल 2025 में आयोजित इस परीक्षा को अनियमितताओं और नकल माफिया की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिलने के बाद निरस्त कर दिया।

यह कदम योग्य अभ्यर्थियों के हित में उठाया गया है, ताकि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रहे।
यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द: परीक्षा रद्द होने का पूरा मामला
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC), प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के तहत अप्रैल 2025 में
सहायक आचार्य के पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को हुई,
जिसमें करीब 1.14 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
परीक्षा के बाद नकल माफियाओं से जुड़ी गुप्त सूचनाएं एसटीएफ को मिलीं, जिसमें धांधली, फर्जी प्रश्नपत्र और
अवैध धन वसूली के आरोप लगे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपनीय जांच के आदेश दिए। जांच में एसटीएफ
ने 20 अप्रैल 2025 को तीन आरोपियों – महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल – को गिरफ्तार किया। ये
आरोपी फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी कर रहे थे। मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स के विश्लेषण से
पता चला कि परीक्षा की शुचिता भंग हो चुकी है।
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सीएम योगी के निर्देश
सीएम योगी ने परीक्षा रद्द करने के साथ ही UPESSC को निर्देश दिए कि नई परीक्षा जल्द से जल्द पूरी पारदर्शिता
और निष्पक्षता के साथ आयोजित की जाए। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नकल माफियाओं पर सख्त
कार्रवाई जारी रहेगी। यह फैसला ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है।
निष्कर्ष
योगी सरकार का यह फैसला भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मजबूत मिसाल है। नकल माफियाओं के खिलाफ
सख्ती से जहां गलत लोगों पर शिकंजा कसेगा, वहीं योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा। नई परीक्षा के आयोजन
से हजारों युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा और प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र की भर्तियां और मजबूत होंगी। यह कदम
अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।










