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Ashok Chaudhary Net Worth: JD(U) मंत्री की संपत्ति और प्रोफाइल की पूरी जानकारी

On: November 24, 2025 1:53 PM
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Ashok Chaudhary Net Worth: बिहार की राजनीति में अशोक चौधरी का नाम नीतीश कुमार के सबसे करीबी सहयोगियों में शुमार है। शेखपुरा जिले के बरबीघा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले डॉ. अशोक चौधरी अब ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद बने नए कैबिनेट में उनकी जगह मजबूत हुई है।

लेकिन सवाल यह उठता है कि एक डॉक्टरेट धारक, जो कभी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे, ने आज करोड़ों की संपत्ति

कैसे अर्जित की? चुनावी हलफनामों, सार्वजनिक दस्तावेजों और हालिया खबरों के आधार पर हम यहां उनकी प्रोफाइल,

राजनीतिक सफर और संपत्ति का विस्तृत विवरण दे रहे हैं। ये आंकड़े मुख्य रूप से 2023-2025 के बीच के हलफनामों

और ADR रिपोर्ट्स से लिए गए हैं, जो चुनाव आयोग की साइट पर उपलब्ध हैं।

Ashok Chaudhary Net Worth: अशोक चौधरी का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

अशोक चौधरी का जन्म 25 फरवरी 1968 को शेखपुरा जिले के एक साधारण परिवार में हुआ। वे पासी समुदाय से हैं,

जो बिहार में अनुसूचित जाति का हिस्सा है। उनकी शिक्षा ग्रामीण बिहार की कठिनाइयों के बीच हुई। उन्होंने मगध

विश्वविद्यालय, बोधगया से 2003 में राजनीति विज्ञान में पीएचडी पूरी की।

इससे पहले पटना विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री ली। डॉक्टरेट के बावजूद उन्होंने राजनीति को चुना, लेकिन 2025

में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने उन्हें राजनीति विज्ञान में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित किया।

उन्होंने कहा कि अगर पटना के आसपास का विश्वविद्यालय मिला तो दोनों भूमिकाएं संभाल लेंगे। उनका परिवार

राजनीति से जुड़ा है – बेटी शंबवी चौधरी 2024 में लोजपा (आरवी) के टिकट पर वैशाली से सांसद बनीं।

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राजनीतिक सफर:

कांग्रेस से JD(U) तक की लंबी दौड़ अशोक चौधरी की राजनीति 2000 में शुरू हुई, जब वे कांग्रेस के टिकट पर बरबीघा

विधानसभा सीट से जीते। 2005 में दोबारा विधायक बने। 2013 में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी (BPCC) के अध्यक्ष बने,

जो दलित समुदाय के लिए ऐतिहासिक था। लेकिन 2018 में नीतीश कुमार के करीब आने पर उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और

JD(U) में शामिल हो गए। 2014 से बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। 2015-2017 में शिक्षा और आईटी मंत्री रहे,

फिर 2019 से भवन निर्माण विभाग का प्रभार संभाला। 2020-2025 तक ग्रामीण विकास मंत्री रहे।

JD(U) में वे बिहार इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव हैं।

2025 चुनाव में NDA की जीत के बाद 20 नवंबर को नीतीश कुमार के 10वें शपथग्रहण में मंत्री बने। उनकी ताकत

दलित वोट बैंक और नीतीश के साथ नजदीकी में है। हालांकि, 2025 में प्रशांत किशोर ने उन पर 200 करोड़ की

अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया, जिसका चौधरी ने खारिज करते हुए 100 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा।

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संपत्ति का विस्तृत ब्रेकडाउन: 2025 हलफनामे से आंकड़े

2023 के हलफनामे के अनुसार, अशोक चौधरी की कुल संपत्ति लगभग 6 करोड़ रुपये थी। लेकिन 2024-2025 में

यह बढ़कर करीब 10 करोड़ रुपये हो गई, जैसा कि वार्षिक संपत्ति घोषणा और ADR डेटा से पता चलता है। सबसे

ज्यादा बढ़ोतरी (3.94 करोड़) 2022-2023 में भवन निर्माण विभाग से जुड़ी रही।

2025 के कैबिनेट विस्तार के समय जारी आंकड़ों में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। आइए, हिसाब देखें:

चल संपत्ति (Movable Assets):

करीब 2.5 करोड़ रुपये। इसमें बैंक बैलेंस, शेयर, म्यूचुअल फंड, गोल्ड (लगभग 300-400 ग्राम) और वाहन शामिल

हैं। दो लग्जरी कारें (SUV) और एक बाइक का मूल्य 40-50 लाख है।

अचल संपत्ति (Immovable Assets):

लगभग 7 करोड़ रुपये। शेखपुरा और पटना में मकान, कृषि भूमि (करीब 10 एकड़) और प्लॉट। भूमि मूल्यांकन में

15-20% की वृद्धि हुई, जो ग्रामीण विकास प्रोजेक्ट्स से जुड़ी लगती है।

कर्ज (Liabilities):

1.2 करोड़ रुपये। बैंक लोन मुख्य रूप से व्यवसाय विस्तार और घरेलू खर्च के लिए। कोई डिफॉल्ट नहीं दर्ज।

आय स्रोत:

सालाना आय 25-30 लाख रुपये। इसमें मंत्री वेतन (12-15 लाख), किराया (5-7 लाख), कृषि आय

(3-5 लाख) और निवेश से कमाई शामिल। पत्नी की आय अलग से 5-6 लाख सालाना है।

ये आंकड़े मायनेटा.इन और चुनाव आयोग के हलफनामों से हैं। ध्यान दें, आरोपों के बावजूद कोई आपराधिक केस

या आयकर छूट नहीं दिखी। औसत बिहार मंत्री की संपत्ति (5 करोड़) से ऊपर है, लेकिन NDA के अन्य नेताओं

से कम।

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संपत्ति पर उठे सवाल: आरोपों की राजनीतिक जंग

2025 में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि चौधरी ने दो साल में 200 करोड़ की

संपत्ति अवैध तरीके से अर्जित की। किशोर ने इस्तीफे की मांग की, लेकिन चौधरी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया।

JD(U) ने कहा कि संपत्ति शिक्षा और राजनीति से बनी है। हलफनामों में सब पारदर्शी है, लेकिन बिहार की सियासत में

ऐसे आरोप आम हैं। इससे पहले 2022 में भी शिक्षा विभाग के टेंडरों पर सवाल उठे थे, जो कोर्ट में साफ हो गए।

बिहार कैबिनेट में अशोक चौधरी की भूमिका: ग्रामीण विकास विभाग

20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA सरकार में चौधरी को ग्रामीण विकास विभाग सौंपा गया।

पहले वे भवन निर्माण मंत्री थे। NDA की 202 सीटों वाली जीत में JD(U) को 8 मंत्रालय मिले। चौधरी ने कहा, “ग्रामीण

बिहार को मजबूत सड़कें और विकास मिलेगा।” उनकी नियुक्ति दलित प्रतिनिधित्व और नीतीश की रणनीति का हिस्सा

है। होम विभाग BJP को जाने पर उन्होंने कहा, “यह युवा नेतृत्व को मौका है, कोई बड़ी बात नहीं।”

निष्कर्ष

अशोक चौधरी की प्रोफाइल बिहार की राजनीति का एक जीवंत चित्र है – कांग्रेस से JD(U) तक का सफर, डॉक्टरेट से

मंत्री तक की उड़ान। 10 करोड़ की संपत्ति उनकी मेहनत और संगठनात्मक क्षमता को दर्शाती है, लेकिन आरोपों ने इसे

विवादास्पद बना दिया। पारदर्शिता बनाए रखना ही उनकी असली परीक्षा होगी। अगर वे ग्रामीण विकास में सुधार लाते

हैं, तो शेखपुरा से सीमांचल तक फायदा पहुंचेगा। बिहार को ऐसे नेताओं की जरूरत है जो शिक्षा और राजनीति को जोड़ें,

न कि सवालों का शिकार बनें। जनता अब देख रही है कि क्या यह दौलत विकास का इंजन बनेगी।

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