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Dilip Kumar Jaiswal की दौलत का सच: BJP मंत्री की संपत्ति कितनी है?

On: November 24, 2025 1:05 PM
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Dilip Kumar Jaiswal Net Worth
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Dilip Kumar Jaiswal: बिहार की राजनीति में दिलीप कुमार जायसवाल का नाम इन दिनों खूब चर्चा में है। हाल ही में नीतीश कुमार सरकार के विस्तार में वे उद्योग विभाग के मंत्री बने हैं, साथ ही बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय हैं। 1963 में जन्मे जायसवाल एक डॉक्टर, शिक्षाविद् और संगठनकर्ता के रूप में जाने जाते हैं।

Dilip Kumar Jaiswal Net Worth
Dilip Kumar Jaiswal की दौलत का सच: BJP मंत्री की संपत्ति कितनी है?

लेकिन सवाल यह उठता है कि एक साधारण क्लर्क से शुरू हुई उनकी यात्रा आज इतनी संपत्ति कैसे जमा कर लाई?

चुनावी हलफनामे और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर हम यहां उनकी दौलत का पूरा ब्योरा दे रहे हैं।

यह जानकारी 2023-2025 के बीच दाखिल हलफनामों से ली गई है, जो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है।

Dilip Kumar Jaiswal की राजनीतिक यात्रा: क्लर्क से कैबिनेट मंत्री तक

दिलीप जायसवाल का सफर प्रेरणादायक है। खगड़िया जिले के रहने वाले जायसवाल ने अपनी पढ़ाई एमबीए, एमएससी,

एमफिल और पीएचडी पूरी की। शुरुआती दिनों में वे एक सरकारी क्लर्क थे, लेकिन जल्द ही शिक्षा के क्षेत्र में कूद पड़े।

आज वे किशनगंज के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमडी हैं। राजनीति में 2014 में किशनगंज से लोकसभा चुनाव लड़

चुके हैं, हालांकि हार गए।

फिर बिहार विधान परिषद के सदस्य बने और तीन बार चुने गए। 2022-2023 में विपक्ष के नेता रहे। जुलाई 2024 से

बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष हैं। नीतीश सरकार में पहले राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रहे, अब उद्योग विभाग संभाल

रहे हैं। उनकी लोकप्रियता वैश्य समाज और सीमांचल क्षेत्र में मजबूत है।

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संपत्ति का पूरा ब्रेकडाउन: चल-अचल और कर्ज का हिसाब

2023 के बिहार विधान परिषद चुनाव हलफनामे के मुताबिक, जायसवाल की कुल संपत्ति लगभग 8.51 करोड़ रुपये

है। लेकिन 2025 के हालिया कैबिनेट विस्तार के समय जारी आंकड़ों में यह बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये बताई गई है।

यह वृद्धि मुख्य रूप से निवेश और संपत्ति मूल्यांकन से जुड़ी लगती है। आइए, विस्तार से देखें:

चल संपत्ति (Movable Assets): लगभग 2.5 करोड़ रुपये। इसमें कैश, बैंक बैलेंस, शेयर, म्यूचुअल फंड और

ज्वेलरी शामिल हैं। जायसवाल के पास विभिन्न कंपनियों के शेयर हैं, जो मेडिकल कॉलेज से जुड़े हैं। उनकी पत्नी

की चल संपत्ति भी इसी श्रेणी में जोड़ी गई है।

अचल संपत्ति (Immovable Assets): करीब 6 करोड़ रुपये। इसमें किशनगंज और पटना में मकान, प्लॉट

और कृषि भूमि आती है। खासकर मेडिकल कॉलेज से जुड़ी जमीनें मूल्य में बढ़ी हैं। 2023 से 2025 के बीच भूमि

मूल्यांकन में 10-15% की वृद्धि दर्ज की गई।

कर्ज (Liabilities): 56 लाख रुपये। यह मुख्य रूप से बैंक लोन और बिजनेस क्रेडिट से जुड़ा है, जो कॉलेज विस्तार

के लिए लिया गया। कोई डिफॉल्ट नहीं दिखा।

आय स्रोत: जायसवाल की सालाना आय 50 लाख से ज्यादा है। इसमें सैलरी (मंत्री पद से 20 लाख+), कॉलेज से

डिविडेंड और किराया शामिल। पत्नी की आय भी 15-20 लाख सालाना है।

ये आंकड़े एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और चुनाव आयोग के हलफनामों से लिए गए हैं। ध्यान

दें, संपत्ति

घोषणा में कोई आपराधिक केस जुड़ा नहीं है।

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संपत्ति पर उठे सवाल: क्लर्क से करोड़पति कैसे बने?

जायसवाल की दौलत को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 2025 में आरोप

लगाया कि “क्लर्क से कॉलेज मालिक तक का सफर संदिग्ध है।” उन्होंने फर्जी डिग्री और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए,

लेकिन जायसवाल ने इन्हें राजनीतिक साजिश बताया। BJP ने कहा कि उनकी संपत्ति पारदर्शी है और शिक्षा-स्वास्थ्य

क्षेत्र में निवेश से बनी। हलफनामे में कोई आयकर छूट या अनियमितता नहीं दिखी। फिर भी, बिहार की राजनीति में

ऐसी चर्चाएं आम हैं, जहां मंत्री की संपत्ति करोड़ों में पहुंचना स्वाभाविक लगता है।

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बिहार कैबिनेट में जायसवाल की भूमिका: उद्योग विभाग की कमान

नवंबर 2025 में नीतीश कुमार के 10वें कार्यकाल में जायसवाल को उद्योग विभाग सौंपा गया। इससे पहले वे राजस्व

मंत्री थे। BJP को 14 मंत्रालय मिले, जिसमें होम, स्वास्थ्य और उद्योग प्रमुख हैं। जायसवाल ने कहा, “बिहार में निवेश

बढ़ाने के लिए उद्योग विभाग मजबूत बनेगा।” उनकी नियुक्ति NDA की एकजुटता का संकेत है, खासकर 2025

विधानसभा चुनावों के बाद।

निष्कर्ष

दिलीप कुमार जायसवाल की संपत्ति बिहार की राजनीति का एक आईना है – मेहनत, शिक्षा और संगठन से बनी, लेकिन

सवालों से घिरी। 9 करोड़ की दौलत उनके लिए उपलब्धि है, जो क्लर्क से मंत्री बनने की कहानी को रेखांकित करती है।

लेकिन पारदर्शिता बनाए रखना ही असली चुनौती है। बिहार के विकास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी, बशर्ते आरोपों

का जवाब ठोस सबूतों से दिया जाए। जनता को अब यह देखना है कि क्या यह दौलत सार्वजनिक हित में लगेगी या

राजनीतिक बहस का विषय बनी रहेगी।

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