Gorakhpur cyber crime: गोरखपुर में साइबर अपराधियों ने एक नया तरीका अपनाया है। ठगों ने नगर निगम आयुक्त की फोटो और नाम से फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाया और नगर निगम के एक कर्मचारी को मैसेज भेजकर पैसे मांगने की कोशिश की। मैसेज की शुरुआत कुछ इस तरह हुई – “हेलो, आप कैसे हैं?” इसके बाद बातचीत को आगे बढ़ाते हुए ठग ने मदद के नाम पर रुपये ट्रांसफर करने को कहा।

सौभाग्य से, कर्मचारी ने सतर्कता दिखाई और मैसेज पर शक किया। उसने तुरंत असली नगर आयुक्त से संपर्क किया,
जहां पता चला कि यह अकाउंट पूरी तरह फर्जी है। यह घटना दिसंबर 2025 के अंत में सामने आई, जब साइबर ठग
सरकारी अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग करके लोगों को ठगने की फिराक में हैं।
Gorakhpur cyber crime: कैसे होता है यह फ्रॉड?
साइबर अपराधी सबसे पहले सोशल मीडिया या ऑफिशियल वेबसाइट से अधिकारी की प्रोफाइल पिक्चर डाउनलोड
करते हैं। फिर उसी फोटो और नाम से नया WhatsApp नंबर रजिस्टर कर लेते हैं।
इसके बाद अधिकारी के संपर्क में आने वाले कर्मचारियों, सहकर्मियों या परिचितों को मैसेज भेजते हैं। शुरुआत में
सामान्य बातचीत जैसे “हेलो, कैसे हैं?” या “लंबे समय बाद बात हुई” से विश्वास जीतते हैं।
एक बार बातचीत शुरू हो जाए, तो इमरजेंसी का बहाना बनाकर पैसे मांगते हैं। जैसे – “मीटिंग में हूं, फोन नहीं कर
सकता, जल्दी से इतने रुपये भेज दो, बाद में लौटा दूंगा” या गिफ्ट कार्ड खरीदने को कहते हैं।
अगर पीड़ित पैसे भेज देता है, तो ठग गायब हो जाते हैं।
गोरखपुर में यह मामला नगर निगम तक पहुंचा, जहां आयुक्त के नाम से बने अकाउंट से कर्मचारी को टारगेट किया
गया। कर्मचारी की सजगता से बड़ी ठगी टल गई, लेकिन यह घटना बताती है कि साइबर ठग अब कितने शातिर हो
चुके हैं।
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क्यों बढ़ रहे ऐसे मामले?
आजकल WhatsApp का इस्तेमाल हर कोई करता है, और सरकारी अधिकारी भी अपने नंबर पब्लिक डोमेन में शेयर
करते हैं। ठग आसानी से प्रोफाइल पिक्चर और नाम कॉपी कर लेते हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में अधिकारियों
के नाम पर फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी के कई मामले सामने आए हैं। इससे न सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान होता है, बल्कि
सरकारी अधिकारी की छवि भी खराब होती है।
पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। गोरखपुर साइबर सेल इस मामले की जांच
कर रही है और फर्जी नंबर को ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।
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खुद को कैसे बचाएं?
- किसी भी मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें, भले ही प्रोफाइल पिक्चर परिचित की लगे।
- पैसे मांगने वाला मैसेज आए तो सबसे पहले फोन करके वेरिफाई करें।
- WhatsApp पर दो स्टेप वेरिफिकेशन ऑन रखें।
- अनजान नंबर से आए मैसेज को रिपोर्ट और ब्लॉक करें।
- साइबर क्राइम की शिकायत 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर करें।
निष्कर्ष
गोरखपुर नगर आयुक्त के नाम से फर्जी WhatsApp अकाउंट बनाकर ठगी का यह प्रयास साइबर अपराध की
बढ़ती चुनौती को दर्शाता है। अच्छी बात यह है कि कर्मचारी की सतर्कता से ठगी नहीं हो पाई, लेकिन यह घटना
सबको चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया में सावधानी जरूरी है।
पुलिस और प्रशासन को ऐसे मामलों में तेज कार्रवाई करनी चाहिए, साथ ही लोगों को जागरूक करना होगा।
अंत में, याद रखें – कोई भी इमरजेंसी में पैसे मांग रहा है तो पहले कन्फर्म करें, वरना एक गलती से बड़ा
नुकसान हो सकता है। साइबर सुरक्षित रहें, सतर्क रहें!