Labour Law New Update 2026: सैलरी, पीएफ और ग्रेच्युटी नियमों में बड़े बदलाव

Published on: December 27, 2025
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Labour Law New Update 2026: भारत में श्रम सुधारों का नया दौर शुरू हो चुका है। सरकार ने 21 नवंबर 2025 से चार नए श्रम संहिताओं को प्रभावी कर दिया है, जिनकी पूरी नियमावली और कार्यान्वयन 1 अप्रैल 2026 से होने की उम्मीद है। ये बदलाव सैलरी स्ट्रक्चर, प्रॉविडेंट फंड (पीएफ), ग्रेच्युटी और सोशल सिक्योरिटी को प्रभावित करेंगे। मुख्य फोकस वेज कोड और सोशल सिक्योरिटी कोड पर है, जहां बेसिक सैलरी कम से कम 50% होनी अनिवार्य होगी।

Labour Law New Update 2026
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इससे पीएफ और ग्रेच्युटी की राशि बढ़ेगी, लेकिन कई कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी अब सिर्फ एक साल की सर्विस पर मिलेगी। आइए विस्तार से समझते हैं ये बदलाव क्या हैं और आप पर क्या असर पड़ेगा।

Labour Law New Update 2026: नए श्रम संहिताएं क्या हैं और कब लागू होंगी?

सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर चार नए कोड बनाए हैं:

  • कोड ऑन वेजेस (2019)
  • इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020)
  • कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020)
  • ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड (2020)

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ये 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हैं, लेकिन ड्राफ्ट रूल्स जल्द प्रकाशित होंगे और पूर्ण कार्यान्वयन अप्रैल 2026 से होगा।

इसका मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा देना है।

सैलरी स्ट्रक्चर में मुख्य बदलाव: 50% बेसिक पे नियम

वेज कोड के तहत अब “वेजेस” की नई परिभाषा है – बेसिक पे, डियरनेस अलाउंस और रिटेनिंग अलाउंस कुल CTC का

कम से कम 50% होना चाहिए। पहले कई कंपनियां बेसिक को कम रखकर अलाउंस बढ़ाती थीं, ताकि पीएफ और ग्रेच्युटी

कम कटे।

अब अगर अलाउंस 50% से ज्यादा हैं, तो अतिरिक्त हिस्सा बेसिक में जोड़ा जाएगा। इससे:

  • पीएफ कंट्रीब्यूशन (12%) बढ़ेगा
  • ग्रेच्युटी कैलकुलेशन बेस बढ़ने से ज्यादा होगी
  • इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है, अगर CTC नहीं बढ़ाया गया

उदाहरण: अगर कुल सैलरी 70,000 रुपये है और बेसिक 30,000, तो अतिरिक्त को जोड़कर बेसिक 35,000 हो जाएगा।

पीएफ ज्यादा कटेगा।

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पीएफ नियमों में बदलाव

सोशल सिक्योरिटी कोड से पीएफ कवरेज बढ़ेगा – गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी शामिल

किया जाएगा। आधार-लिंक्ड यूनिवर्सल अकाउंट नंबर से पीएफ पोर्टेबल होगा।

2026 में EPFO 3.0 लॉन्च होगा, जिससे विड्रॉल और पेंशन फिक्सेशन तेज होगा। बेसिक बढ़ने से कर्मचारी और एम्प्लॉयर

दोनों का 12% कंट्रीब्यूशन बढ़ेगा, रिटायरमेंट सेविंग मजबूत होगी।

ग्रेच्युटी नियमों में राहत

सोशल सिक्योरिटी कोड की बड़ी राहत – फिक्स्ड-टर्म या कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को अब सिर्फ एक साल की कंटीन्यूअस सर्विस

पर ग्रेच्युटी मिलेगी (पहले 5 साल)। परमानेंट कर्मचारियों के लिए अभी भी 5 साल का नियम।

कैलकुलेशन: 15/26 × लास्ट ड्रॉन वेजेस × सर्विस ईयर। बेसिक बढ़ने से पेआउट ज्यादा होगा। नॉन-कैश बेनिफिट्स का 15% तक भी जोड़ा जा सकता है।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

  • सैलरी हर महीने की 7 तारीख तक देना अनिवार्य
  • नियुक्ति पत्र (अपॉइंटमेंट लेटर) देना जरूरी
  • फ्री हेल्थ चेकअप (40 साल से ऊपर वालों के लिए)
  • गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी कवरेज

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