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संत गाडगे महाराज पुण्यतिथि: आज 20 दिसंबर 2025 को महाराष्ट्र के महान समाज सुधारक और मानवता के सच्चे उपासक संत गाडगे महाराज की पुण्यतिथि है। वे स्वच्छता अभियान के अग्रदूत थे, जिन्होंने झाड़ू को अपना शस्त्र बनाकर गांव-गांव में सफाई का संदेश फैलाया।

उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। इस लेख में हम उनके जीवन, कार्यों और प्रेरणादायक शिक्षाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
संत गाडगे महाराज पुण्यतिथि: संत गाडगे महाराज का प्रारंभिक जीवन
संत गाडगे महाराज का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शेंडगांव में एक साधारण धोबी परिवार में
हुआ था। उनका असली नाम देबूजी झिंगराजी जानोरकर था। बचपन से ही वे मेहनती और सहयोगी स्वभाव के थे। गांव में
किसी की मदद की जरूरत पड़ती तो सबसे आगे वे ही रहते।
एक दिन अपनी बेटी की नामकरण Ceremony के दौरान उन्होंने शराब और मांस की जगह शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसा,
जो उनकी सामाजिक सोच का प्रारंभिक संकेत था।
धीरे-धीरे वे घर-गृहस्थी से विरक्त हो गए और 1905 के आसपास घर त्यागकर संन्यास की राह पर चल पड़े। उनके पास सिर्फ
एक टूटा-फूटा गाडगे (मिट्टी का बर्तन), झाड़ू और एक छोटा सा कमंडल था। इसी गाडगे से उन्हें ‘गाडगे महाराज’ का नाम मिला।
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स्वच्छता और समाज सुधार में अतुलनीय योगदान
संत गाडगे महाराज को स्वच्छता का प्रतीक कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं। वे गांवों में पहुंचते और सबसे पहले झाड़ू
उठाकर सड़कें, नालियां और विशेषकर दलित बस्तियों को साफ करते। उनका मानना था कि “स्वच्छता ही ईश्वर है”। वे कहते
थे कि गंदगी से बीमारियां फैलती हैं और समाज की उन्नति के लिए सफाई अनिवार्य है।
उन्होंने शराब, अंधविश्वास, पशु बलि और जातिवाद जैसी कुरीतियों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। कीर्तन के माध्यम से
वे लोगों को जागृत करते। उनके कीर्तनों में संत तुकाराम के अभंगों का खूब प्रयोग होता। वे शिक्षा को महत्व देते थे और पिछड़े
बच्चों के लिए छात्रावास खोले। धर्मशालाएं, पशु आश्रय और नदी घाट बनवाए।
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर से उनकी गहरी मित्रता थी। बाबासाहेब उन्हें ज्योतिराव फुले के बाद सबसे बड़ा जनसेवक मानते थे।
दोनों मिलकर सामाजिक सुधार पर चर्चा करते। महाराष्ट्र सरकार ने उनके नाम पर संत गाडगे बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान
शुरू किया, जो आज भी गांवों में सफाई को प्रोत्साहित करता है। भारत सरकार ने भी उन्हें डाक टिकट से सम्मानित किया।
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उनके प्रेरणादायक विचार और शिक्षाएं
गाडगे महाराज सरल जीवन और उच्च विचार के जीवंत उदाहरण थे। कुछ प्रमुख शिक्षाएं:
- मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।
- स्वच्छ शरीर और स्वच्छ मन से ही सच्ची भक्ति संभव है।
- शिक्षा से अज्ञान दूर होता है और समाज मजबूत बनता है।
- शराब और व्यसनों से दूर रहो, मेहनत से जीवन जियो।
वे खुद भिक्षा मांगकर खाते, लेकिन दान का पैसा गरीबों, अनाथों और सार्वजनिक कार्यों में लगाते।
निधन और अमर विरासत
20 दिसंबर 1956 को अमरावती जाते समय पेढ़ी नदी के किनारे वलगांव के पास उनका देहांत हुआ। लेकिन उनकी शिक्षाएं
आज भी जीवंत हैं। स्वच्छ भारत अभियान में उनकी सोच स्पष्ट दिखती है। अमरावती विश्वविद्यालय का नाम उनके सम्मान में
संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय रखा गया।
निष्कर्ष
संत गाडगे महाराज जैसे महान संत दुर्लभ होते हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा और समाज की उन्नति के लिए
समर्पित कर दिया। उनकी पुण्यतिथि पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलें – स्वच्छता अपनाएं,
कुरीतियों का त्याग करें और जरूरतमंदों की मदद करें। उनकी विरासत हमें सिखाती है कि सच्ची खुशी सेवा और सादगी में
है। उन्हें बार-बार नमन।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: संत गाडगे महाराज की पुण्यतिथि कब मनाई जाती है? उत्तर: हर साल 20 दिसंबर को, क्योंकि 1956 में इसी दिन
उनका निधन हुआ था।
प्रश्न 2: संत गाडगे महाराज को स्वच्छता का प्रतीक क्यों कहा जाता है? उत्तर: वे हमेशा झाड़ू लेकर गांवों की सफाई करते
थे और स्वच्छता को भक्ति का हिस्सा मानते थे। उनके नाम पर महाराष्ट्र में ग्राम स्वच्छता अभियान चलता है।
प्रश्न 3: संत गाडगे महाराज का असली नाम क्या था? उत्तर: देबूजी झिंगराजी जानोरकर।
प्रश्न 4: डॉ. अंबेडकर और गाडगे महाराज का क्या संबंध था? उत्तर: दोनों अच्छे मित्र थे और सामाजिक सुधार पर चर्चा
करते थे। अंबेडकर उन्हें फुले के बाद सबसे बड़ा जनसेवक कहते थे।
प्रश्न 5: गाडगे महाराज की प्रमुख शिक्षाएं क्या थीं? उत्तर: स्वच्छता, शिक्षा, व्यसन मुक्ति, मानव सेवा और अंधविश्वास
का त्याग।
प्रश्न 6: उनके सम्मान में क्या योजनाएं हैं? उत्तर: संत गाडगे बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान और अमरावती विश्वविद्यालय
का नामकरण।











